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विक्षोभ मरने के बाद भी पीछा नहीं छोड़ता

भूत-प्रेतों के अस्तित्व पर कई लोग विश्वास करते हैं और कई नहीं भी करते हैं | यह सच है कि अनेक बार सामान्य घटनाओं को भी भूत-प्रेत की लीला समझा जाता है और अनेक सम्बन्ध में अतिरंजति कल्पनाएं (imagines) की जाती हैं | भूत-प्रेतों से सम्बंधित अधिकांश मामलों के मूल में अंधविश्वास (superstition), धोखाधड़ी और अज्ञान ही कारण होते हैं, पर यह मानने के पर्याप्त कारण हैं कि भूत-प्रेतों का अस्तित्व है और वे कई तरह से अपने अस्तित्व का परिचय देते हैं | कौन-सी घटना से भूत-प्रेतों का अस्तित्व सिद्ध होता है और कौन-सी बातें मात्र अन्धविश्वास हैं, यह भेद करना कठिन है | किन्तु परामनोविज्ञान (parapsychology) की शोधों के अनुसार अब यह शास्त्रीय मान्यता पुष्ट हो चुकी है कि मरने के बाद और जन्म लेने के पूर्व जीव कुछ समय तक अशरीरी अवस्था (bodiless state) में रहता है | कुछ शांत आत्माएं इस अवस्था में चुपचाप रहती हैं और अपने उपयुक्त गर्भ (suitable foetus) का चुनाव करने के लिए प्रतीक्षा करती रहती हैं | किन्तु कई विक्षुब्ध आत्माएं (disturbing spirits) अशरीरी अवस्था में भी अपने जीवन काल की मनःस्थिति (emo...

आत्मा का अस्तित्व इंकारा नहीं जा सकता - existence of soul

भारतीय तथा विश्व के अन्य सभी धर्मो में पुनर्जन्म की मान्यता है की मरणोत्तर जीवन कितना लंबा होता है और उस अवधि में किस प्रकार निर्वाह करना पड़ता है | मतभेद इन्हीं बातों पर है | पुनर्जन्म को अस्वीकारा किसी ने भी नहीं -- भले ही उसके लिए प्रलयकाल जितनी लंबी प्रतीक्षा करने के लिए कहा गया हो | धार्मिको की तरह पुरातन दर्शन-शास्त्र भी पुनर्जन्म (rebirth) के समर्थक रहे हैं | उन चार्वाक जैसों की संख्या नगण्य है, जिनमे आत्मा के अस्तित्व (existence of soul) से इंकार करने के साथ-साथ एक ही सांस में पुनर्जन्म की मान्यता का भी सफाया कर दिया | कठिनाई आधुनिक वैज्ञानिको ने उत्पन्न की है जिनने पदार्थ (substance) को ही सब कुछ माना और आत्मा के अस्तित्व से इंकार कर दिया | जब आत्मा ही नहीं तो पुनर्जन्म किसका ? आस्तिकता (religioner) के सभी सिद्धांत (theory) आत्मा की अमरता और ईश्वर की न्याय व्यवस्था के साथ जुड़ते हैं | यदि इन दो तथ्यों को अमान्य ठहरा दिया जाय तो फिर चेतना (consciousness) की स्वतंत्र सत्ता की समाप्ति हो जाती है और संसार मात्र रासायनिक पदार्थों (chemical substances) का ऐसा खिलौना भर रह...

मरने के बाद के जीवन की अनुभूतियाँ - स्वर्ग-नरक की सच्चाई

मरणोपरांत जीवन के सम्बन्ध में प्रत्यक्ष अनुभवों के उदाहरणों से परिपूर्ण ' Life After Life ' पुस्तक के लेखक डा. रेमन्ड इ. मूडी हैं। जिन्होंने 50 ऐसे व्यक्तियों के अनुभवों को इस पुस्तक में संग्रहीत किया है। जिन्हें डॉक्टरों ने मृतक घोषित कर दिया था।  किन्तु थोड़ी देर बाद वह पुनः जीवित हो उठे।  स्वर्गीय अनुभवों से युक्त इस पुस्तक के कई बार संस्करण प्रकाशित हो चुके हैं। रिमांड इ. मूडी जब वर्जोनिया विश्व विद्यालय में छात्र थे तब उनके एक मनोविज्ञान के प्रोफेसर ने बताया की अपनी बीमारियों के दौरान वह दो बार मर चुके हैं। उनके कथन को लेखक ने टेपरिकार्ड कर लिया था।  उनके अनुसार मृत्यु के बाद महाशांति प्राप्त होती है।  लेखक जब कारोलिना विश्वविद्यालय में प्राध्यापक था। तब उसके एक छात्र ने अपनी दादी की मृत्यु के बाद पुनः जीवित हो उठने की बात बताई।  जिसमें मृत्यु के बाद अंधेरी गुफा, घंटियों की आवाज, महाप्रकाश व पितरों की आत्मा से साक्षात्कार की बात उस महिला ने स्वीकार की थी।   Also Read :  RevenueHits Ads Network पर Account बना...

मृत्यु के बाद आत्मा की क्या स्थिती होती है : यह रहस्य है

मृत्यु के समय की स्थिति - प्राकृतिक मृत्यु का आभास मनुष्य को पहले ही लग जाता है। आभास लगते ही उसके मानस पर जीवन की वे तमाम घटनाएं सजीव होने लगती है जिनका जीवन में भारी मूल्य रहा। सारे पाप- पुण्य, अच्छाई - बुराई स्मृति में आने लगती है।  एक प्रकार की बेचैनी, घबराहट सी होने लगती है।  सारा शरीर फटने लगता है।  खून की गति मंद पड़ने लगती है।  श्वास की भी गति उखड़ने लगती है।  शनैः शनैः बाह्य चेतना लुप्त होने लगती है जो बाद में एक गहरी मूर्च्छा के रूप में बदल जाती है।  इसी मूर्च्छा की स्थिति में खुली हुई किसी भी इन्द्रिय के मार्ग से आत्मा एक नीरव झटके के साथ शरीर छोड़कर बाहर निकल जाती है। Social Media Fans Counter Widget को Blog में कैसे Add करे ? Blogger Blog को Hacker से Secure कैसे रखे : 10 Tips अप्राकृतिक मृत्यु में चेतन शून्यता और मूर्च्छा प्रायः एक ही समय होती है और उसी स्थिति में आत्मा शरीर से अलग हो जाती है। अकाल मृत्यु अत्यंत कष्टदायिनी है।  धीरे-धीरे बाह्य चेतना पूर्ण रूप से लुप्त हो जाने पर भी मूर्च्छा की स्थिति शीघ्र पैद...